दीपावली का पावन उत्सव वर्ष 2026 में 6 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर तक चलेगा। धनतेरस के दिन से शुरू होने वाला यह पंचदिवसीय दीपोत्सव मुख्य रूप से रविवार, 8 नवंबर 2026 को बड़ी दिवाली (लक्ष्मी पूजा) के रूप में मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पांच दिनों में खरीदारी, दीपदान, और देव आराधना के लिए निश्चित समय और स्थिर लग्न का विशेष महत्व होता है।
पांच दिवसीय दीपोत्सव का संपूर्ण कैलेंडर और शुभ मुहूर्त
स्थानीय पंचांग गणना (जमशेदपुर, झारखंड) और सामान्य समयानुसार इस वर्ष के त्योहारों की विस्तृत समय-सारणी इस प्रकार है:
- धनतेरस (शुक्रवार, 6 नवंबर 2026):कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 नवंबर की रात 10:16 बजे से शुरू होकर 6 नवंबर की रात 11:21 बजे तक रहेगी। धनतेरस पर नए बर्तन, सोना, चांदी, वाहन या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। खरीदारी तथा भगवान धनवंतरी की पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न (कुंभ) का शुभ समय शाम 5:29 बजे से शाम 7:01 बजे तक रहेगा। धनतेरस पूजा के लिए चौकी को उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर स्थापित किया जाना चाहिए, क्योंकि धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी का संबंध उत्तर दिशा से है।
- छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी (शनिवार, 7 नवंबर 2026):इसे रूप चौदस और काली चौदस भी कहा जाता है। चतुर्दशी तिथि 6 नवंबर की रात 11:21 बजे से 7 नवंबर की रात 11:47 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान (यम दीपम) करने का विधान है, जिसका शुभ समय शाम 5:14 बजे से शाम 6:31 बजे तक रहेगा।
- बड़ी दिवाली / महालक्ष्मी पूजा (रविवार, 8 नवंबर 2026):दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (जमशेदपुर): शाम 5:28 बजे से शाम 7:26 बजे तक (प्रदोष काल: शाम 5:04 बजे से शाम 7:38 बजे तक)।
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली): शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक।
- गोवर्धन पूजा / अन्नकूट (सोमवार, 9 नवंबर / मंगलवार, 10 नवंबर 2026):भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की पावन स्मृति में प्रकृति और गोवंश की सेवा की जाती है। क्षेत्रीय पंचांगों के अनुसार यह 9 या 10 नवंबर को संपन्न होगा। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे से आरंभ होकर 10 नवंबर को दोपहर 1:03 बजे तक रहेगी। गोवर्धन पूजा का प्रमुख समय 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे से शाम 4:09 बजे तक रहेगा।
- भाई दूज / यम द्वितीया (मंगलवार, 10 नवंबर / बुधवार, 11 नवंबर 2026):बहनें अपने भाइयों के दीर्घायु और समृद्धि की कामना के साथ तिलक करती हैं। क्षेत्रीय भेद के अनुसार यह 10 या 11 नवंबर को मनेगा। द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर 1:03 बजे से शुरू होकर 11 नवंबर दोपहर 1:03 बजे तक मान्य रहेगी। भाई दूज का तिलक मुहूर्त 10 नवंबर को दोपहर 1:03 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक रहेगा, अथवा 11 नवंबर की सुबह भी तिलक किया जा सकता है।
पूजन सामग्री सूची
महालक्ष्मी और श्रीगणेश के विधि-विधान से पूजन हेतु निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है:
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र, पूजा की चौकी और उस पर बिछाने हेतु लाल या पीला वस्त्र।
- गंगाजल, कलावा (मौली), जनेऊ, आम के पत्ते, कलश, नारियल।
- रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (चावल), पान, सुपारी, लौंग, इलायची।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और शहद का मिश्रण)।
- मिट्टी के दीये, रुई की बत्ती, घी या तेल, धूप, कपूर।
- पुष्प, फूलों की माला, दूर्वा, ताजे फल, मिठाई, खील-बताशे और सोना अथवा चांदी का सिक्का।
दिवाली लक्ष्मी पूजन की प्रामाणिक विधि
- सफाई और तैयारी: प्रातःकाल घर की पूर्ण स्वच्छता करें। सायंकाल पूरे भवन को दीपों और प्रकाश व्यवस्था से सुसज्जित करें।
- चौकी व कलश स्थापना: शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा इस प्रकार स्थापित करें कि उनका मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा में रहे। निकट ही जल से भरा कलश रखें, जिसके मुख पर आम के पत्ते और ऊपर नारियल प्रतिष्ठित हो।
- तिलक एवं अर्चन: सर्वप्रथम भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी का ध्यान करें। इसके पश्चात उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य अर्पित करें। इसी क्रम में भगवान कुबेर और मां सरस्वती की भी विधिपूर्वक आराधना करें।
- मंत्र एवं आरती: पूजा के दौरान “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” अथवा “ॐ गं गणपतये नमः” का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इसके बाद माता लक्ष्मी और गणेश जी की आरती उतारें।
- दीपदान: संपूर्ण पूजा संपन्न होने के उपरांत घर के मुख्य द्वार, आंगनों और खिड़कियों पर घी एवं तेल के पारंपरिक दीपक प्रज्वलित करें।
यहाँ दीपोत्सव 2026 के पांचों दिनों की तिथियों, समय और शुभ मुहूर्तों की संपूर्ण तुलनात्मक तालिका दी गई है:
| त्योहार का नाम | मुख्य तारीख व दिन | संबंधित तिथि का समय | मुख्य अनुष्ठान / खरीदारी का शुभ मुहूर्त | विशेष विवरण / संदर्भ |
| 1. धनतेरस | 6 नवंबर 2026
(शुक्रवार) | त्रयोदशी तिथि:
• प्रारंभ: 5 नवंबर, रात 10:16 बजे
• समाप्त: 6 नवंबर, रात 11:21 बजे | खरीदारी एवं धनवंतरी पूजा मुहूर्त:
• शाम 5:29 बजे से शाम 7:01 बजे तक | प्रदोष काल और स्थिर लग्न (कुंभ); बर्तन, सोना, चांदी, वाहन व बही-खाते की खरीदारी। पूजा चौकी का मुख उत्तर/ईशान में रखें। |
2. छोटी दिवाली
(नरक चतुर्दशी / काली चौदस / रूप चौदस) | 7 नवंबर 2026
(शनिवार) | चतुर्दशी तिथि:
• प्रारंभ: 6 नवंबर, रात 11:21 बजे
• समाप्त: 7 नवंबर, रात 11:47 बजे | यम दीपम (दीपदान) मुहूर्त:
• शाम 5:14 बजे से शाम 6:31 बजे तक | यमराज के निमित्त दीपदान का विधान। |
3. बड़ी दिवाली
(महालक्ष्मी पूजा) | 8 नवंबर 2026
(रविवार) | अमावस्या तिथि:
• प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
• समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे | लक्ष्मी पूजा मुहूर्त:
• जमशेदपुर: शाम 5:28 से शाम 7:26 बजे
(प्रदोष काल: शाम 5:04 से 7:38 बजे)
• नई दिल्ली: शाम 5:54 से रात 7:50 बजे | मां लक्ष्मी, श्रीगणेश, कुबेर व मां सरस्वती पूजन; प्रदोष काल व स्थिर लग्न; पूजा के बाद चौखट व आंगनों में दीपदान। |
4. गोवर्धन पूजा
(अन्नकूट) | 9 नवंबर / 10 नवंबर 2026
(सोमवार / मंगलवार) | प्रतिपदा तिथि:
• प्रारंभ: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
• समाप्त: 10 नवंबर, दोपहर 01:03 बजे | गोवर्धन पूजा का शुभ समय:
• दोपहर 12:31 बजे से शाम 4:09 बजे तक (9 नवंबर) | गोवर्धन पर्वत लीला स्मरण, गोवंश सेवा और प्रकृति पूजन (तिथि अनुसार क्षेत्रीय पंचांगों में 9 या 10 नवंबर)। |
5. भाई दूज
(यम द्वितीया) | 10 नवंबर / 11 नवंबर 2026
(मंगलवार / बुधवार) | द्वितीया तिथि:
• प्रारंभ: 10 नवंबर, दोपहर 01:03 बजे
• समाप्त: 11 नवंबर, दोपहर 01:03 बजे | भाई दूज तिलक मुहूर्त:
• 10 नवंबर: दोपहर 01:03 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक
• अथवा 11 नवंबर की सुबह | बहनें भाइयों को तिलक लगाकर दीर्घायु व समृद्धि की कामना करती हैं (क्षेत्रीय पंचांग भेद अनुसार 10 या 11 नवंबर)। |
क्या आप इस त्योहार पर अपनी राशि या साथी के साथ कुंडली व ज्योतिषीय अनुकूलता (compatibility) की जांच करना चाहते हैं? अभी हमारे ऑनलाइन Astrology Compatibility Calculator (Hindi) का उपयोग करें और जानें कि यह दीपोत्सव आपके और आपके परिवार के लिए कितना शुभ और अनुकूल रहने वाला है।
(वैकल्पिक रूप से, त्यौहारों के बीच के दिन और समय के अंतर की गणना करने के लिए आप हमारे Date Calculator का भी उपयोग कर सकते हैं।)





